मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित एकलपीठ में बुधवार को बहुचर्चित आरटीओ भ्रष्टाचार एवं मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आरोपी पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
सौरभ शर्मा की ओर से दायर आवेदन में कहा गया कि उनकी पत्नी दिव्या तिवारी गंभीर साइनस समस्या से जूझ रही हैं और उनकी सर्जरी प्रस्तावित है। ऑपरेशन के दौरान उनकी देखभाल के लिए पति की उपस्थिति आवश्यक है। याचिका में यह भी बताया गया कि उनके दो नाबालिग बच्चे अबीर और सुवीर क्रमशः 11 और 9 वर्ष के हैं, जो पूरी तरह अपने माता-पिता पर निर्भर हैं।
- सौरभ शर्मा ने 60 दिन की अंतरिम जमानत मांगी।
- पत्नी की साइनस सर्जरी का दिया हवाला।
- दो नाबालिग बच्चों की देखभाल का भी उल्लेख।
- सरकार ने जमानत आवेदन का विरोध किया।
- हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
- जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने फैसला सुरक्षित रखा।
- पहले नियमित जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं।
- बहुचर्चित RTO भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ा है मामला।
आवेदन में तर्क, परिवार में कोई जिम्मेदार सदस्य नहीं
आवेदन में दावा किया गया कि परिवार में ऐसा कोई अन्य जिम्मेदार सदस्य नहीं है, जो बच्चों की देखभाल कर सके। इसी आधार पर 60 दिन की अस्थायी जमानत देने का अनुरोध किया गया।
सरकार की तरफ से कोर्ट में जमानत आवेदन का विरोध किया
वहीं, सरकार की ओर से जमानत आवेदन का विरोध किया गया। पक्षकारों ने अदालत को बताया कि जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी से जुड़े आर्थिक नेटवर्क में कई रिश्तेदार और सहयोगी शामिल रहे हैं। ऐसे में परिवार की देखभाल के लिए अन्य किसी व्यक्ति के उपलब्ध नहीं होने के दावे पर सवाल उठते हैं।
जिला और हाईकोर्ट पहले भी जमानत याचिकाएं खारिज कर चुके
उल्लेखनीय है कि इससे पहले जिला अदालत और हाईकोर्ट दोनों ही सौरभ शर्मा की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर चुके हैं। अब अंतरिम जमानत को लेकर हाईकोर्ट के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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